Saturday, October 28, 2017

विंटर में आई मेकअप



इस मौसम में आप चाहती है कि आप औरो से अलग दिखे तो मेकअप करते समय अपनी आंखों के मेकअप पर ज्यादा ध्यान दें कि क्योंकि अट्ैक्टिव आंखे सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। जहां गर्मियों मेें आप डार्क मेकअप करने में डरती है वहीं आप सर्दियों में डार्क और ब्राइट कलर्स अपना सकती है आईए जाने कैसे-

कलर्स फार आईशैडो
आईशैडो में आप डार्क कलर्स को अपना सकती है। पेस्टल रंग से दूर एवं गाढ़े रंगों का प्रयोग करें। गाढ़े रंगों के लाईनर में नेवी, प्लम, हंटर ग्रीन, ब्राउन लगाकर आँखों को एडवेंचरस लुक दे सकती हैं।

स्किन के अकोर्डिंग
आईशैडो के लिए तैलीय त्वचा वाली महिलाएं पाउडर वाले आईशैडो का ही इस्तेमाल करें। जबकि नार्मल और ड्राई स्किन वालों के लिए पाउडर और क्रीमी दोनों तरह का आईशैडो उपयुक्त होता है। सांवली रंगत के लिए रस्ट, ब्राउन के साथ गोल्डन आईशैडो का मिक्स मैच ट्रेंड में है। जबकि गोरी रंगत की महिलाएं गुलाबी और मोव के साथ सिल्वर के मिक्स मैच से अपनी आंखों को हाइलाइट कर सकती हैं।

स्मोकी आईज
मेकअप में आजकल जो ट्ेंड चल रहा है वो है स्मोकी आईज का। आँखों के लिए पर्पल का इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि यह हर तरह के स्किन टाइप और टोन्स पर फबता है। आँखों को डार्कर लुक देने के लिए काले रंग का आईलाइनर लगाएँ। अपने आउटफिट से मेल खाते हुए अलग-अलग रंगों को मिला सकती हैं। आईशैडो में गोल्डन, चॉकलेट ब्राउन, ब्रोंज, गाढ़ा लाल, मैरून, पीला, बेरी, ग्रे स्मोकी लुक देने के लिए बेहतर होता है। खासकर जब किसी पार्टी में जाना हो तो मस्कारा में नेवी रंग का मस्कारा लगाएँ।

आईब्रो- अकसर महिलाएँ ठंड के दिनों में आलस के कारण आईब्रो शेप करवाने में आनाकानी करती हैं पर बिना आईब्रो को शेप में रखें मेकअप अधूरा लगेगा। ध्यान रहें कि बहुत पतली आईब्रो रखने का ट्रेंड नही है।

रेड लिपस्टिक
न्यूट्रल लिप्स और न्यूट्रल मेकअप इस मौसम में लगाकर देखें। लाल लिपस्टिक का इस्तेमाल करते वक्त आँखों का मेकअप हल्का ही रखें। ब्राउन आईलाइनर, लाइट ब्राउन शैडो और ब्लैक मस्कारा का कॉम्बिनेशन लाल लिपस्टिक के साथ सभी पर अच्छा लगेगा।

कलर काॅम्बिनेशन को ध्यान में रखे
मौसम चाहे कोई भी हो, अपनी स्किन टोन और स्किन टाइप को ध्यान में रखकर ही मेकअप का चुनाव करें। गोरी स्किन टोन के लिए आप ब्राइट शेड्स का इस्तेमाल कर सकती हैं, जबकि सांवली स्किन टोन के लिए लाइट और नैचुरल शेड्स का इस्तेमाल ही बेहतर है। इसी तरह तैलीय त्वचा के लिए सिलिकॉन और वॉटरप्रूफ मेकअप का ही प्रयोग किया जाना चाहिए।

शेड्स का चुनाव करें
शेडस का इस्तेमाल करते समय ध्यान दें कि डे टाइम है या नाइट टाइम। दिन और ऑफिस में नैचुरल कलर्स का ही चुनाव करें, जबकि पार्टी या शादी में और रात के वक्त आप ब्राइट और बोल्ड शेड्स कर इस्तेमाल कर सकती हैं।

इन का रखे ख्याल-
-सर्दियों में स्किन काफी रूखी हो जाती है ऐसे आंखों के आस पास की स्किन पर गहरा असर पड़ता है ऐसे में स्किन की केयर करना जरूरी है।
-अपनी कलर के अकोर्डिंग ही आई मेकअप करे।
-डे और नाइट को ध्यान मे रखते हुए मेकअप करें।

ब्यूटीशन रेखा से बातचीत पर आधारित

Friday, October 27, 2017

सर्दियों में न करे रक्तचाप की अनदेखी



वर्तमान काल में आवष्यकताओं की पूर्ति के लिए हर कोई बेहद व्यस्त है। जरूरतों को पूरा करने के चक्कर में कहीं ऐसा तो नहीं आपकी उम्र समय से पहले कम होती जा रही है या यूं कहे आपकी सेहत पर इस कदर जरूरतें हावी हो गई कि आपको ये ख्याल नहीं है कि आप कब बिमारियों की चपेट में आ गए है। आपका रहन सहन,खान पान और व्यायाम सभी इस पर निर्भर करता है कि स्वयं पर आप कितना ध्यान दे पाते है। बिमारियों में जो आजकल सबसे ज्यादा देखने में आती है वह है रक्तचाप की समस्या और ये समस्या सर्दियों में अनदेखी करने से और भी अधिक दुखदायी हो जाती है। सर्दियों में ज्यादातर लोगों को हाई ब्लड प्रेषर का डर रहता है। क्योंकि ठंडे तापमान की वजह से षरीर के ब्लड सेल्स पतले होने लगते है जिसमें रक्त संचार के लिए अधिक प्रेषर लगता है। आईए जानिए रक्त चाप से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बातें-

रक्तचाप
रक्तचाप या ब्लड प्रेशर रक्तवाहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर डाले गए दबाव को कहते हैं। धमनी वह नलिका होती हैं जो रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाती है।  हृदय रक्त को धमनियों में पंप करता है। किसी भी व्यक्ति का रक्तचाप सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप के रूप में जाना जाता है। जैसे 120/80 सिस्टोलिक अर्थात ऊपर की संख्या धमनियों में दाब को दर्शाती है। इसमें हृदय की मांसपेशियाँ संकुचित होकर धमनियों में रक्त को पंप करती है।  डायस्टोलिक रक्तचाप अर्थात नीचे वाली संख्या धमनियों में उस दाब को दर्शाती है जब संकुचन के बाद हृदय की मांसपेशियाँ शिथिल हो जाती हैं। रक्तचाप उस समय अधिक होता है जब हृदय रक्त को धमनियों में पंप करता है। एक स्वस्थ व्यक्ति का सिस्टोलिक रक्तचाप 90 और 120 मिलीमीटर के बीच होता है। सामान्य डायस्टोलिक रक्तचाप 60 से 80 मिमी के बीच होता है। रक्तचाप संबंधी दो प्रकार की समस्याएँ देखने में आती हैं- एक निम्न रक्तचाप और दूसरी उच्च रक्तचाप।

उच्च रक्तचाप और उसके लक्षण
ज्यादातर उच्च रक्तचाप की अवस्था तब आती है जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है जिसके कारण हृदय को सामान्य से ज्यादा कार्य करना पड़ता है। इस अवस्था केा हाइपरटेंषन भी कहते है। ये एक ऐसे ज्वालामुखी की तरह होता है जो पहले तो षांत दिखता है लेकिन फटता है तो हार्टटेक,किडनी और षरीर के किसी अंग जैसे अवसाद पैदा कर देता है। साथ ही ठंड में यदि बीपी मरीज ध्यान न दे तो ठंड लगने से दिमाग की नसें सिकुड़ने लगती हैं। चक्कर आने लगता है और ब्रेन हेमरेज होने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके लक्षण
- सिर में भारीपन, चक्कर आना, दर्द रहना
- आलस आना, नींद न आना, जी घबराना,उल्टी या मितलाई
- जरा-सी दौड़-भाग करने पर सांस फूलना
- हाथ-पैरों में दर्द रहना
-चलते समय आँखों के सामने अँधेरा छाना
-हृदय दर्द होना

ऐसे लोग जिनमें ये समस्या अधिकतर देखने को मिलती है-
उच्च रक्तचाप की समस्या अधिकतर उन लोगों में पाई जाती है जिनका रहन सहन और खान पान सही नहीं है। खाने में अधिक नमक और वसा का इस्तेमाल इसको और अधिक बढ़ावा देता है। व्यायाम सही प्रकार से नहीं करना और आॅफिस या घर में ज्यादातर बैठे रहने का कार्य मोटापे को बढ़ाता है। मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति ज्यादातर इसके षिकार होते है। साथ ही उन व्यक्तियों में जिनमें मधुमेह,हार्मोनल परिवर्तन,आनुवंषिक कारण,धुम्रपान और षराब आदि इस समस्या से ग्रस्त है उनमे बी पी की समस्या देखने को मिलती है। सर्दियों में अक्सर लोग सोचते है कि गर्म चीजे जैसे तील,गुड़ आदि लेने से षरीर में गर्मी आएगी लेकिन इनकी अत्यधिक मात्रा से षुगर लेवल और रक्तचाप की समस्या और अधिक बढ़ जाती है।

निम्न रक्तचाप और उसके लक्षण
निम्न रक्तचाप वह दाब है जिससे धमनियों और नसों में रक्त का प्रवाह कम होने के लक्षण या संकेत दिखाई देते हैं। जब रक्त का प्रवाह काफी कम होता है तो मस्तिष्क, हृदय तथा गुर्दे जैसी महत्वपूर्ण इंद्रियों में ऑक्सीजन और पौष्टिक पदार्थ नहीं पहुँच पाते। इससे यह अंग सामान्य कामकाज नहीं कर पाते और स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है। 
लक्षण -
थकान महसूस होना, याददाश्त कमजोर होना, किसी भी काम में मन न लगना,
रोगी की धड़कन की गति कम हो जाती है,चक्कर आना,चिड़चिड़ापन,घबराहट,आलस आदि होना,नाड़ी की गति कम होना,कभी कभी बेहोश भी हो सकते है,ज्यादा पसीना आना,भूख न लगना,दिल घबराना,हाथ पैरो का ठंडा पड़ जाना,थोड़ा सा भी काम करने पर दिल का जोरो से धड़कना।

ऐसे लोग जिनमें ये समस्या अधिकतर देखने को मिलती है-
अक्सर कार्य में व्यस्त होने के कारण भोजन को सही समय पर नहीं करना या यूं कहे कि नाष्ता और दोपहर का भोजन एक ही समय पर कर लेना। जिससे शरीर में नमक व पानी की कमी होने पर रक्तचाप निम्न हो जाता है। काफी समय तक निराषा महसूस होना साथ ही लम्बे समय तक बीमार रहने पर भी आई कमजोरी रक्तचाप का कारण बनती दिखती है। इसके अलावा षरीर में विटामिन बी और सी की कमी होना,बासी और असंतुलित भोजन करने से,गर्भावस्था में खून की कमी होने पर,अनीमिया ,टी बी रोग जिनको होते है, उनका रक्तचाप भी निम्न रह सकता है,अधिक मासिक स्त्राव के दौरान भी रक्तचाप निम्न हो सकता है,कब्ज की परेशानी भी निम्न रक्तचाप व् अन्य बीमारियो को आमंत्रित करती है।

उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए
- वजन को कंट्रोल में रखें।
- खाने में नमक की मात्रा कम रखें।
- चीनी, चावल और मैदा से परहेज करें।
- शराब और स्मोकिंग से परहेज करें।
- नियमित एक्सरसाइज करें।
-कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
-लाइफ स्टाइल बदलें।
 -तली चीजें और जंक फूड नहीं खाएं।
-तनाव या चिंता का पता लगाएं और लाइफ स्टाइल को कंट्रोल में रखें।
-डाॅक्टर से सलाह लेते रहे। साथ ही अपनी जांच करवाते रहे।

निम्न रक्तचाप से बचाव के लिए
-अधिक परिश्रम वाला काम न करे।
-अधिक मात्रा में पानी पिए।
-अधिक समय तक धूप या गर्मी वाले स्थान पर न रहे।
-तला हुआ व् मिर्च मसालेदार भोजन से परहेज करे।
-रात के समय चाय या कॉफी का सेवन न करे।
-एक ही बार में ज्यादा न खाए,अपितु थोड़ा थोड़ा खाना, थोड़े थोड़े अंतराल में खाते रहे।
-निम्न रक्तचाप होने पर नमक व् घी का अधिक मात्रा में सेवन करे।
-पानी ,सूप आदि का अधिक मात्रा में सेवन करे।
-रक्तचाप की समस्या दिखते ही तुरंत डाॅक्टर से सम्पर्क करे।


जर्नल फिजिषियन डी.के.चैहान से बातचीत पर आधारित

Tuesday, October 24, 2017

कम सोने के खतरे



आमतौर पर वयस्कों की लाइफस्टाइल में पर्याप्त नींद मिलना भी एक लक्जरी बन गया है. वयस्कों को रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद चाहिए. अगर आप लगातार कम नींद ले रहे हैं, तो आगे चलकर यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है.

मस्तिष्क को नुकसान
स्वीडन की उपसाला यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नींद से मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद मिलती है. अगर ऐसा ना हो तो दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले अणु काम में लग जाते हैं. टेस्ट में प्रयोग में शामिल लोगों के खून में इन अणुओं की संख्या में सिर्फ एक रात ना सोने की वजह से ही करीब 20 प्रतिशत बढ़ी हुई पाई गई.

डिप्रेशन या अवसाद
दुनिया भर के 15 करोड़ लोग नींद से जुड़ी बीमारियों के शिकार हैं, जबकि विकसित देशों में 10 फीसदी लोग पूरी नींद नहीं ले पाते. साल 2007 में 10,000 लोगों पर हुई रिसर्च बताती है कि जो लोग कम सोते हैं उनके अवसाद में जाने की संभावना आम लोगों से पांच गुना ज्यादा है

जल्दी मौत
अमेरिका के नेशनल स्लीप फाउंडेशन की सलाह है कि वयस्क लोगों को हर रात सात से नौ घंटे तक सोना चाहिए. एक ताजा शोध के अनुसार हर रोज बीस मिनट तक कसरत करने से असामयिक मौत का खतरा 16 से 30 प्रतिशत तक घट जाता है. इसलिए लंबा जीवन जीना है तो हर रात अच्छी नींद लेना भी उसी ओर एक कदम है.

हृदय की समस्याएं
अमेरिका में 2012 में कार्डियोलोजी सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए शोध के नतीजों से पता चला कि दिल की समस्याओं का खतरा भी नींद से जुड़ा है. इसमें शोधकर्ताओं ने 3,000 से अधिक लोगों के डाटा का विश्लेषण किया. पाया गया कि पर्याप्त नींद ना लेने वालों में एनजाइना का खतरा दोगुना और कोरोनरी धमनी की बीमारी का जोखिम 1.1 गुना बढ़ जाता है.

कैंसर
कम सोने की वजह से ब्रेस्ट कैंसर और अन्य तरह के कैंसर भी हो सकते हैं। कैंसर पैदा करने वाले फ्री रैडिकल्स शरीर से बाहर निकलने में असमर्थ हो जाते हैं और शरीर में गंदगी जमती रहती है, जिससे अन्य बीमारियां पैदा होती हैं।


मोटापा
रिसर्च बताती है कि एक रात जागने के बाद ही मेटाबोलिज्म में लगने वाली ऊर्जा की खपत में 5 से 20 फीसदी तक की कमी आती है. नींद ना मिले तो अगली सुबह ही ब्लड शुगर, भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन घ्रेलीन और तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टीसोल की मात्रा बढ़ी हुई पाई जाती है. कई दूसरे शोध दिखाते हैं कि पांच घंटे या उससे कम सोने वालों में वजन बढ़ना आम है.
स्वीडन की उपसामोटापा
रिसर्च बताती है कि एक रात जागने के बाद ही मेटाबोलिज्म में लगने वाली ऊर्जा की खपत में 5 से 20 फीसदी तक की कमी आती है. नींद ना मिले तो अगली सुबह ही ब्लड शुगर, भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन घ्रेलीन और तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टीसोल की मात्रा बढ़ी हुई पाई जाती है. कई दूसरे शोध दिखाते हैं कि पांच घंटे या उससे कम सोने वालों में वजन बढ़ना आम है.ला यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नींद से मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद मिलती है. अगर ऐसा ना हो तो दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले अणु काम में लग जाते हैं. टेस्ट में प्रयोग में शामिल लोगों के खून में इन अणुओं की संख्या में सिर्फ एक रात ना सो

मस्तिष्क को नुकसान

स्वीडन की उपसाला यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नींद से मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में काफी मदद मिलती है. अगर ऐसा ना हो तो दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले अणु काम में लग जाते हैं. टेस्ट में प्रयोग में शामिल लोगों के खून में इन अणुओं की संख्या में सिर्फ एक रात ना सोने की वजह से ही करीब 20 प्रतिशत बढ़ी हुई पाई गई.ने की वजह से ही करीब 20 प्रतिशत बढ़ी हुई पाई गई.

Sunday, October 22, 2017

आईलाइनर का इस्तेमाल और भी कई तरीके से




जब भी हम मार्केट से कोई प्रोडक्ट खरीदते है तो हम सबसे पहले उसके इस्तेमाल के बारे में जानना चाहते है। क्योंकि यदि आपको प्रोडक्ट को यूज करना ही नहीं आएगा। तो आपके लिए वह प्रोडक्ट और पैसे दोनो ही बर्बाद जाएंगे। कई बार कुछ ऐसे मेकअप प्रोडक्टस होते है जिनके प्रयोग अलग अलग तरह से किये जा सकते है लेकिन हमें उनके इस्तेमाल के बारे में पता ही नहीं होता है। इसी तरह हम यहां आईलाइनर का इस्तेमाल मल्टीपल तरीके से बता रहे है। जिससे आप एक ही प्रोडक्ट का कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैै आईए जाने कैसे आप आईलाइनर को आप और भी कई तरीके से इस्तेमाल मेें ला सकती है-

आईलाइनर
वैसे तो आंखों को खुबसूरत दिखाने के लिए आईलाइनर का इस्तेमाल किया जाता है। पलको के उपर लीड पर आप हमेषा लाईनर लगाती है। साथ ही आज आईलाइनर लगाने के भी बहुत से स्टाइल चल रहे है जिन्हे लगाकर आप स्वयं को स्टाइलिष लुक देती है। और हां इनमें ढेरों कलर भी मार्केट में देखने को मिल रहे है लेकिन अब आप इसका इस्तेमाल कुछ और भी अलग ढंग से कर सकती है।

लगाएं काजल की जगह
यदि आप और भी खुबसूरत दिखना चाहती है तो आईलाइनर का इस्तेमाल काजल की तरह आंखों की नीचे वाली लीड पर करें। साथ ही यदि आप इसको थोड़ा मोटा करके लगाएंगी तो आपकी आंखे और भी अट्ैक्टिव और बड़ी नजर आएगी।

मस्कारा
आपके पास मस्कारा नहीं है और आप मार्केट से मस्कारा लाने की सोच रही है तो जरूरी नहीं है कि आप मस्कारा खरीद करके लाएं। आईलाइनर को भी आप मस्कारे की जगह इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए आईलाइनर के ब्रष को पलकों पर नीचे से उपर की ओर ले जाते हुए मस्कारे की तरह इसे लगाएं। लेकिन जरूरी है कि इसे लगाने से पहले पलकों को आईलैष कर्लर से कर्ल जरूर कर लें।

बिन्दी
माथे पर लगी बेहद खुबसूरत नजर आती है। बिंदी लगाने के लिए आईलाइनर का इस्तेमाल बखूबी कर सकती है। आईलाइनर की सहायता से माथे पर बिंदी लगाएं। बिन्दी छोटी या बड़ी ये आप अपनी इच्छानुसार लगा सकती है या फिर कोई डिजाइन भी बना सकती है।

ब्यूटी स्पाॅट या टैटू
यदि आपको अपनी खुबसूरती को चार चांद लगाना है तो आप अपने फेस को ब्यूटी स्पाॅट भी दे सकती है इसके लिए आप अपने चेहरे में ऐसी जगह जहां तिल खुबसूरत लगता है वहां आईलाइनर की सहायता से तिल बना सकती है। इसके अलावा यदि आप किसी पार्टी या फंक्षन में जा रही है और टैटू बनाना चाहती है तो आईलाइनर की सहायता से टेम्परेररी टैटू बना सकती है।

सफेद बालों को छुपाएं
अगर आपके सिर पर एक या दो सफेद रंग के बाल हैं तो आप उन्हें आईलाइनर की सहायता से छुपा सकती हैं। वैसे भी यदि आपके हेयरस ब्राउन है तो आप ब्राउन लाईनर का इस्तेमाल कर सकती है।

आईब्रो लाइनर
यदि आपकी आईब्रो थोड़ी हल्की है या फिर लाइट ब्राउन बाल है। तो आप आईलाइनर का इस्तेमाल करके उसे घनी दिखा सकती है। साथ ही अपनी आईब्रो को शेप देने के लिये आईलाइनर का इस्तेमाल कर सकती है।

ब्यूटी एक्सपर्ट बबीता बत्रा से बातचीत पर आधारित

रस्सी कूदे स्वस्थ रहे



आॅफिस हो या घर आज ज्यादातर सभी कार्यो में षारीरिक मेहनत खत्म सी हो गई है। जिसके कारण मोटापा बढ़ता जा रहा है और बिमारियां बढ़ रही है सो अलग। समय न होने के कारण आप कहीं भी वर्कआउट के लिए जाने में असमर्थ सा महसूस करते है। मोटापा,षरीर में थकान,दर्द आदि चीजों से बचने के लिए जरूरी है कि आप कोई भी एक वर्कआउट चुन ले जैसे की रस्सा कूदना। कहने में तो रस्सा कूदना आपको बड़ा छोटा सा व्यायाम नजर आता होगा लेकिन इस छोटे से व्यायाम के ढेरो फायदे आईए हम उन्हे आपको बताते है-

रस्सा कूदना
व्यायाम करते समय पसीना निकला स्वाभाविक है लेकिन जब ये पसीना काफी ज्यादा मात्रा में निकले तो और भी फायदेमंद रहता है। हम कोई भी व्यायाम करते है उसमे पसीना निकलता है लेकिन जब हम रस्सा कूदते है तो काफी तेजी से पसीना निकलता है यह सेहत की दृष्टि से काफी फायदेमंद है क्योंकि इससे षरीर के अनावष्यक तत्व बाहर आ जाते है। रस्सी कूदने के लिए 15 मिनट का समय भी बहुत है, वहीं इस व्यायाम को करने के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं। घर के किसी खुले कोने में यह किया जा सकता है और उपकरण के रूप में सिर्फ आपको चाहिए रस्सी।

हृदय सम्बंधी लाभ
रस्सी कूदने से हमारे हृदय तंत्र को बेहद लाभ पहुंचता है। हृदय तेजी से धड़कता है जिसकेे फलस्वरूप आक्सीजन अधिक मात्रा में फेफड़ों में पहुंचती है जिससे पूरे षरीर में रक्त का संचार तीव्र गति से होता है। इससे षरीर स्वस्थ रहता है और हमारी कार्यक्षमता भी काफी बढ़ जाती है।

मजबूत बनते है हाथ
रस्सी कूदने से हमारी मांसपेषियां खिंचती है साथ ही हाथों का ये अच्छा व्यायाम है। इससे आपके हाथ मजबूत बनतें है। हाथों को लाभ मिलता ही है उसके साथ कंधे भी मजबूत बनते है उनमें ताकत आ जाती है। कंधों में दर्द सम्बन्धी बिमारियों से आपको छुटकारा मिलता है। जब आप रस्सी कूदते हैं तब आपके दोनों हाथों की कलाईयां भी घूमती हैं। एैसे में आपकी कलाईयां मजबूत बनती हैं। जिससे कलाईयों व उंगलियों की अकड़न भी ठीक हो जाती है।

कद बढ़ाने के लिए
बच्चों में यदि आप कद को लेकर परेषान है तो उनको षुरू से ही रस्सा कूदने की आदत डलवाएं इसको नियमित रूप से करने से कद बढ़ता है। ये बच्चों के बढ़ते षारीरिक विकास के लिए लाभदायक व्यायाम है।

मोटापा कम करने के लिए
यदि आप मोटापे से परेषान है तो आप इस व्यायाम को बिना कुछ सोचे समझे कर सकते है क्योंकि जब आप रस्सी कूदते है तब आपका पूरा षरीर गति में रहता हैं जिससे आपके षरीर में अतिरिक्त फैट घटती है। और षरीर को एक षेप मिलती है जिससे आप फिट नजर आते है।

पैरों के लिए
इससे आपके घुटनों और एड़ियों के दर्द से राहत मिलती है। साथ ही वे मजबूत बनते है। लेकिन यदि आपको दर्द की परेषानी है तो आप आरम्भ धीरे धीरे कूदे। लेकिन कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे कि आपका दर्द खत्म होता जा रहा है।

रस्सी कूदते समय ध्यान दें कुछ बातें।
-अगर पार्क में रस्सी कूदें तो आप इस व्यायाम का दुगुना लाभ उठा सकते हैं। प्रकृति के समीप रहकर व्यक्ति अधिक अच्छा महसूस करता है व उसे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलता है। वह प्रसन्नचित महसूस करता है।
-रस्से हमेशा खाली पेट कूदें। सुबह रस्सी कूदना सबसे अधिक लाभप्रद है।
-वस्त्र चाहे जो भी पहनें पर वे खुले व आरामदेह होने चाहिए।
-रस्सी कूदने से पहले हल्के व्यायाम कर लें ताकि मांसपेशियों से कसाब कम हो जाए व उनको नुकसान न पहुंचे।
-बहुत ऊंचा कूदने की जरूरत नहीं। इससे आप गिर भी सकते हैं। रस्सी कूदने की गति भी धीमी रखें।
-शुरूआत में थोड़ा रस्सी कूदें, फिर धीरे-धीरे गति व सीमा बढ़ाएं। अगर पहली बार ही में आप अधिक लक्ष्य रखेंगे तो थकान अधिक होने पर पुनरूप से आप इस व्यायाम को नियमित नहीं कर पाएंगे।
-रस्सी कूदने के तुरंत पश्चात न तो कुछ खाएं और न ही पानी पिएं। 15-20 मिनट पश्चात् ही कुछ खाएं या पिएं।
- रस्सी कूदने का सही तरीका भी सीख लें।
-रस्सी कूदते समय लोग अपनी बाजुओं को अधिक घुमाते हैं जबकि इसमें कलाई को अधिक घुमाना चाहिए।
-रस्सी कूदते समय कमर सीधी होनी चाहिए। रस्सी को नहीं बल्कि सामने रखें। घूटने बिल्कुल सीधे हों लेकिन एक दूसरे से सटे हुए नहीं। आपने पंजे के अगले हिस्सों के बल पर कूदना है।

रस्सी कूदने के अलग अलग ढंग

बेसिक
ये रस्से कूदने का तरीका हम सभी जानते है ये सिंपल तरीके से ही कूदा जाता है।  बड़ी उम्र के लोगों को तो इसी को कूदने में रूचि होती है। क्योंकि ये सिंपल तरीके से कूदने से आपको गिरने का भी डर नहीं रहता है।
बैक्वर्ड
इसमें रस्से से पिछे की ओर कूदा जाता है रस्से को सिर के उपर से पिछे से एड़ियों से निकालते हुए कूदा जाता है। ये भी काफी सरल है लेकिन पिछे की ओर करने से थोड़ा अलग हो जाता है साथ ही पैरो और हाथों पर जोर पड़ने से आपको और भी लाभ पहुंचता है।

क्राॅस स्टेप
इसमें पैरों को क्राॅस करते हुए कूदना हेाता है। क्योंकि एक ही तरह का व्यायाम करते हुए हम थोड़े उब जाते है तो आप इसमे भी इस तरह के स्टेपस करके इसका मजा ले सकते है। और बच्चे इसमें बेहद मजा लेते है। साथ ही इसमें क्राॅस हुए पैरो को आप रूक कर चेंज भी कर सकते है। 

सिजर्ज
इसमें कूदते समय पहले के पैर को आगे करे फिर दूसरे को इस तरह जैसे कैंची चलती है। इससे आपकी अलग अलग तरह की एक्सरसाइज रस्सा कूदते समय हो जाएगी।

वन फूट होप
ये पैरो के लिए बेहद फायदेमंद रोप एक्सरसाइज हैं क्योंकि इसमें आपको एक पैर से कूदना है जिससे आपके षरीर का पूरा भार एक पैर पर आ जाता है जिससे आपके पैर मजबूत होते है। इसमें आपको एक पैर को उपर की ओर करके दूसरे पैर से रस्सी कूदनी है। दूसरी बार में आप पैर चेंज भी कर सकते है।

टोटल बाॅडी फिटनेस के इंस्टक्टर राजेष से बातचीत पर आधारित

Friday, October 13, 2017

पुरानी साड़ियों से बनाएं लाॅन्ग ड्रेस और कुर्तियां


आज हर कोई फैषन के अकोर्डिंग चलना चाहता है। आजकल वैसे भी हमारे पास बहुत से आॅप्षन है जिससे हम फैषनेबल लग सकते है। यदि कुछ पुराने से नए में बदलना है साथ ही आपको फैषन की समझ है और साथ ही कुछ नया ट्राय करना चाहती हैं तो बहुत सारे ऑप्शन्स मौजूद हैं जिनसे आप आइडियाज लेकर पुरानी साड़ियों को नई ड्रेसेस में बदल सकती हैं। आपके वार्डरोब में टंगी हुई इन साड़ियों से आप उब रही है तो क्यों न इन्हे पुराने से नए में बदला जाए। यहां हमारे साथ ममता आनंद जुड़ी है जो फैषन डिजाईनर है और 20 से अपना बुटीक चला रही है के अुनसार आपके पास षिफाॅन,सिल्क,जाॅर्जट,काॅटन आदि किसी भी तरह की पुरानी साड़ी रखी है और आपको समझ नहीं आ रहा कि उसका क्या किया जाए साथ ही वह आपको बेहद पसंद है तो आप उसकी डिजाइनिंग करवाएं। लाॅन्ग ड्ेसज जो बेहद खुबसूरत लगती हैं जिससे आप फैषनेबल भी लगेगी साथ ही आपकी मनपसंद साड़ी की ड्ेस बनने वे आपके यूज में आ जाएगी। यहां हम आपको कुछ साड़ियों की लाॅन्ग ड्ेस की वीडियो दिखा रहे है जो फैषन डिजाइन ममता आनंद के द्वारा बनाई गई है जिसमें उन्होंने पुरानी साड़ियों को लाॅन्ग ड्ेसज में चेंज करके उनका लुक ही अलग कर दिया है-

अच्छी परफोर्मेंस के लिए जरूरी है प्रोपर नींद



एक्जाम के षुरू होते ही स्टूडेंटस स्टडी के लिए काफी सिरियस हो जाते है। ऐसे में घंटो स्टूडेंटस पढ़ाई करते रहते है। देर रात तक व सुबह जल्दी उठकर घंटो पढ़ाई करते रहते है। लेकिन पढ़ाई के इस जुनून में वे अपने प्रॉपर तरीके से नहीं सो रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि प्रॉपर नींद न लेने से सेहत पर तो असर पड़ता ही है साथ ही परफोर्मेस भी खराब होती है। जरूरी है कि प्रोपर नींद लेना।

कम हो जाते हैं एनर्जी पॉकेट
पीडियाट्रिशियन डॉ.वरूण गुप्ता के मुताबिक हमारे शरीर में 8 एनर्जी पॉकेट (ईपी) होते हैं, जो शरीर को हमेशा एक्टिव रखते हैं। ये सभी ईपी प्रॉपर नींद लेने से रीजनरेट होते हैं। लगातार कम नींद लेने से ये ईपी जनरेट होना बंद हो जाते हैं। ऐसे में हमारे शरीर की एक्टिवनेस धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर दिमाग पर पड़ता है, जो बाद में स्ट्रेस या डिप्रेशन का रूप ले लेता है।

स्ट्ेस और डिप्र्रेषन
एक्जाम में जरूरी है कि भरपूर नींद लेना तभी आपका स्वास्थ्य सही रहेगा और एक्जाम भी सही होगा। परीक्षा के दिनों में स्ट्रेस और डिप्रेशन के केस आना आम बात हो गई है। तैयारियों के चलते बच्चे दिन में केवल 3 से 4 घंटे ही नींद लेते हैं, जो हानिकारक है। जब हम नींद कम लेते हैं तो शरीर में मौजूद एड्रीनलिन और कॉटिसॉल नामक कई हार्मोस डवलप नहीं हो पाते। इससे शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।


एक्जाम का डर हावी होना
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार एक्जाम का टेंशन लेने वाले बच्चे अक्सर अच्छा स्कोर नहीं कर पाते। इसकी वजह दिमाग पर हावी होने वाला स्ट्रेस है। दरअसल परीक्षा की तैयारी में वे ऎसे जुटते हैं कि उनके सोने और खाने-पीने का कोई शेडयूल ही नहीं बन पाता। इससे उनकी फिजिकल और मेंटल एनर्जी कवर नहीं हो पाती। इससे धीरे-धीरे कॉन्फिडेंस लेवल कम हो जाता है और बच्चे के मन में एक्जाम का डर हावी होने लगता है।

कम नींद से समस्याएं
एसिडिटी, माइग्रेशन, पेट में परेशानी, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक्स, हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, ओबेसिटी

इनका रखें खयाल
सोने का समय निश्चित करें, सोने से पहले चाय, कॉफी का इस्तेमाल न करें, बैलेंस डाइट लें, पानी खूब लें, लगातार पढ़ाई न करते हुए टुकड़ों में करें, पढ़ाई के बीच टीवी, एक्सरसाइज या फिर छोटी-सी आउटिंग कर लें।


थैलेसीमिया बीमारी



थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रोग है जिसमें शरीर में से हीमोग्लोबिन स्तर कम हो जाता है। यह रोग अनुवांशिक होने के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में चलती रहता हैं। इस रोग में शरीर में लाल रक्त कण नहीं बन पाते है और जो थोड़े बन पाते है वह केवल अल्प काल तक ही रहते हैं।एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या 45 से 50 लाख प्रति घन मिली मीटर होती है। और इन लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण लाल अस्थि मज्जा मेे होता है। लेकिन हीमोग्लोबिन की कमी से पूरे शरीर को सही मात्रा में आॅक्सीजन नहीं मिल पाती है। या यूं कहे हीमोग्लोबिन की उपस्थिमि के कारण ही कोशिकाओं को लाल रंग या रक्त मिलने के साथ शरीर में आॅक्सीजन और कार्बनडाइआॅक्साइड को चक्र बनाए रखता है।
हीमोग्लोबिन में ऑक्सीजन से शीघ्रता से संयोजन कर अस्थायी यौगिक ऑक्सी हीमोग्लोबिन बनाने की क्षमता होती है। यह लगातार ऑक्सीजन को श्वसन संस्थान तक पहुंचा कर जातक को जीवन दान देता रहता है।

जागरूकता जरूरी-
मेजर थैलासीमिया
यह बीमारी उन बच्चों में होने की संभावना अधिक होती है, जिनके माता-पिता दोनों के जींस में थैलीसीमिया होता है। जिसे थैलीसीमिया मेजर कहा जाता है। इसमें बार बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। जन्म के 3 महीने बाद कभी भी इस बीमारी के लक्षण नजर आ सकते हैं।
माइनर थैलासीमिया
थैलीसीमिया माइनर उन बच्चों को होता है, जिन्हें प्रभावित जीन माता-पिता दोनों में से किसी एक से प्राप्त होता है। जहां तक बीमारी की जांच की बात है तो सूक्ष्मदर्शी यंत्र पर रक्त जांच के समय लाल रक्त कणों की संख्या में कमी और उनके आकार में बदलाव की जांच से इस बीमारी को पकड़ा जा सकता है। इसमें अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नजर नहीं आता हैं। कुछ रोगियों में रक्त की कमी या एनिमा हो सकता हैं।
अतः यह अत्यावश्यक है कि विवाह से पहले महिला-पुरुष दोनों अपनी जांच करा लें।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत देश में प्रत्येक वर्ष सात से दस हजार थैलासीमिया पीड़ित बच्चों का जन्म होता है. केवल दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ही यह संख्या करीब 1500 है।भारत की कुल जनसंख्या का 3.4 प्रतिशत भाग थैलासीमिया ग्रस्त हैं।

मुख्य कारण
यह एक अनुवांशिक रोग है जिसमें माता या पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण इसका भुगतान बच्चे को भुगतना पड़ता है। रक्त में हीमोग्लोबिन दो तरह के
प्रोटीन से बनता है अल्फा ग्लोबीन और बीटा ग्लोबीन। इन दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जीन्स में गड़बड़ी होने पर थैलासीमिया होता हैं। सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है। परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर मात्र 20 दिनों की हो जाती है। इसका सीधा प्रभाव शरीर में स्थित हीमोग्लोबीन पर पड़ता हैै। हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाने से शरीर दुर्बल हो जाता है जिसके बाद हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है।

परिणाम
जब हमारे शरीर में खून ही भली प्रकार से नहीं बनेगा तो उसके परिणाम भी घातक होंगे। गर्भवती महिला के पेट में गर्भ ठहर जाने पर अगर बच्चे के अंदर उचित मात्रा में हीमोग्लोबिन का अंश नहीं पहुंचता, तो बच्चा थैलेसीमिया का शिकार हो जाता है। बच्चे के जन्म के छह महिने बाद ही इसके लक्षण दिखने लगते हे। उपचार करने के लिए नियमित रक्त चढाने की आवश्यकता होती हैं। कुछ रोगियों को हर 10 से 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता हैं।ज्यादातर मरीज इसका खर्चा नहीं उठा पाते हैं। सामान्यतः पीड़ित बच्चे की मृत्यु 12 से 15 वर्ष की आयु में हो जाती हैं। सही उपचार लेने पर 25 वर्ष से ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं। थैलासीमिया से पीड़ित रोगियों में आयु के साथ-साथ रक्त की आवश्यकता भी बढ़ते रहती हैं।

थैलासीमिया के लक्षण
सूखता चेहरा, लगातार बीमार रहना, वजन ना बढना और इसी तरह के कई लक्षण बच्चों में थैलासीमिया रोग होने पर दिखाई देते हैै। बच्चों के नाखून और जीभ पिली पड़ जाने से पीलिया भ्रम पैदा हो जाता हैं। बच्चे के जबड़ों और गालों में असामान्यता आ जाती हैं। बच्चे अपनी उम्र से काफी छोटा नजर आता हैं। हमेशा बीमार नजर आना,कमजोरी,सांस लेने में तकलीफ आदि लक्षण दिखाई देने लगते है।

थैलेसीमिया की रोकथाम
बच्चा थैलेसीमिया रोग के साथ पैदा ही न हो, इसके लिए शादी से पूर्व ही लड़के और लड़की की खून की जांच अनिवार्य कर देनी चाहिए। यदि शादी हो भी गयी है तो गर्भावस्था के 8 से 11 सप्ताह में ही डीएनए जांच करा लेनी चाहिए। माइनर थैलेसीमिया से ग्रस्थ इंसान सामान्य जीवन जी पाता है और उसे आभास तक नहीं होता कि उसके खून में कोई दोष है। तो यदि शादी के पहले ही पति-पत्नी के खून की जांच हो जाए तो कफी हद तक इस आनुवांशिक रोग से बच्चों को बचाया जा सकता है।

थैलासीमिया का उपचार
रक्त चढ़ाना
थैलासीमिया का उपचार करने के लिए नियमित रक्त चढाने की आवश्यकता होती हैं। कुछ रोगियों को हर 10 से 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता हैं। सामान्यतः पीड़ित बच्चे की मृत्यु 12 से 15 वर्ष की आयु में हो जाती हैं। सही उपचार लेने पर 25 वर्ष से ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं। थैलासीमिया से पीड़ित रोगियों में आयु के साथ-साथ रक्त की आवश्यकता भी बढ़ते रहती हैं।
चिलेशन थैरेपी-
बार-बार रक्त चढाने से और लोह तत्व की गोली लेने से रोगी के रक्त में लोह तत्व की मात्रा अधिक हो जाती हैं। लीवर तथा ह्रदय में जरुरत से ज्यादा लोह तत्व जमा होने से ये अंग सामान्य कार्य करना छोड़ देते हैं। रक्त में जमे इस अधिक लोह तत्व को निकालने के प्रक्रिया के लिए इंजेक्शन और दवा दोनों तरह के ईलाज उपलब्ध हैं।
बोन मैरो प्रत्यारोपण-
का उपयोग कर बच्चों में इस रोग को रोकने पर शोध हो रहा हैं। इनका उपयोग कर बच्चों में इस रोग को रोका जा सकता हैं।

फिजीशन डाॅ0 डी के चैहान से बातचीत पर आधारित

Thursday, October 12, 2017

जैकेट पहने अपनी ड्रेस को डिफरेंट बना दें



यदि आपको स्टाइलिष दिखना है तो अब जमाना है सिंपल और सोबर ड्ेसज का। भारी भरकम ड्ेसज की बजाए स्टाइलिष और लाइट वेटड ड्ेसज ने अपनी जगह बना ली है। सर्दियां षुरू हो चुकी है ऐसे में हम चाहते है कुछ ऐसा पहनना जिससे हम सर्दी से बच भी सके और स्टाइलिष भी नजर आएं आजकल जैकेट ड्ेसज काफी ट्ेंड में है आईए जानिए किस तरह की ड्ेसज के साथ आप जैकेट पहन कर अलग लग सकती है। 
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षार्ट जैकेट
ये जैकेट काॅलेज गोइंग युवतियांें में खासा पसंद की जा रही है इसे आप जिंस टाॅप के साथ पहनती है तो आपका लुक ही चंेज हो जाता है और पटियाला सलवार सूट पर तो ये बेहद आकर्षक नजर आती है। कट सिल्वस थ्रेड वर्क में ये जैकेट मार्केट में उपलब्ध है ये  कई रंगों और डिजाइन में आपको मिल जाएंगी। इन्हे आप अपनी ड्ेसज से मैच करते हुए पहने या फिर ऐसी जैकेट ले आएं जो कलरफुल हो साथ ही जो आपके सभी प्लेन फुल स्लीव्स टाॅप और कुर्तो पर पहनी जा सके।

जैकेट फाॅर साड़ीज
किसी पार्टी में यदि आपको जाना है और डिफरेंट लगना है तो आप साड़ी पर पहने जाने वाली जैकेटस ले आएं जब आप इन्हे साड़ी पर कैरी करेंगी तो बेहद अट्ैक्टिव और माॅर्डन लग उठेंगी। यदि आपको अपनी साड़ी को हैवी लुक देना है तो जरी वर्क,मिरर वर्क,जर्कन वर्क आदि में इसे खरीदें और यदि सिंपल सोबर लुक चाहिए तो थ्रेड वर्क और वेलवेट और ब्रोकेट में आप इसे खरीद सकते है। सभी तरह की साड़ियों पर चल सकने के लिए आप गोल्डन जैकेट खरीदे ये एक क्लासी लुक देगी।

लहंगा विद जैकेटस
यदि ओकेजन षादी का है और आपको हैवी पहनना है साथ ही लहंगा पहनना है लेकिन कुछ अलग हट कर तो आप लहंगे के उपर जैकेट पहने। ये जैकेट लांग होने के साथ काफी माॅर्डन नजर आती है। ये आप पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे कैरी करना चाहती है। पारदर्षी होने के साथ इनमें कढ़ाई की होती है जो आपके लहंगे को एक नया लुक दे देती हैं। इनमें षेरवानी स्टाइल जैकेटस,एसिमिट्किल कट जैकेट या फलोर लेंथ जैकेट जैसे कई आपको आॅप्षन मार्केट मेें मिल जाएंगे।

लाॅन्ग कुर्ता जैकेटस
आजकल कुर्तियां जो माकेट में मिल रही है उनमे भी जैकेट कुर्ती का काफी क्रेज है। इनमे बहुत सी स्टाइलिष कुर्तियां मार्केट में उपलब्ध है। साथ ही यदि आपके अलमारी में कट स्लिव्स कुर्तियां रखी है और आप उन्हे पहनना चाहती है तो आप उनसे मैच करती हुई जैकेटस ले आए ये षिफाॅन,वेलवेट,ब्रोकेड आदि फैब्रिक मे आपको मिल जाएंगी। इन्हे आप मिक्स एंड मैच करके पहन सकती है।

अनारकली विद जैकेटस
अनारकली सूटस महिलाओं और युवतियों में काफी पसंद किए जाते है। तो क्यों न इन्हे डिफरेंट लुक दिया जाए इसके लिए आप इन पर अचकन या जैकैट पहने आप भीड़ में अलग नजर आएंगी। अनारकली सूटस के साथ जैकेट पहनते समय ध्यान रखें कि सूट एक ही रंग में हो और उसके उपर आगे से खुली स्लिट जैकेट पहने।

कुछ और भी-
-आप जैकेट को लाॅन्ग गाउन पर भी वियर कर सकती है आजकल काफी ट्ेंड में है लेकिन षाॅर्ट जैकेटस ही इस पर फबेगी।
-षाॅर्ट क्राॅप ब्लाउज और लोअर में प्लाजो के उपर जैकेट बेहद डिफरेंट लुक देती है।
-यदि आप थोड़ी फैटी है तो षिफॅान और जाॅजर्ट की स्लीम फीट लगने वाले फैब्रिक की जैकेट ही पहने।
-इन्हे आप अपनी फिगर केा देखते हुए भी बनवा सकती है।
-जैकेटस कट स्लीव्स और फुल स्लीव्स दोनो में ही अच्छा लुक देती है अपनी ड्ेस के अकोर्डिंग ही इन्हे पहनें।
-हमेषा एक कलर की ड्ेस पर ही इन्हे वियर करे नही ंतो इसका लुक सही से उभर कर नहीं आ पाएगा।
फैषन डिजाइनर ममता आनंद से बातचीत पर आधारित

मेकअप फाॅर ग्लोइंग स्किन



कई बार ऐसा होता है कि आप मेकअप तो कराती है या करती है लेकिन एक ग्लो जो होता है वह फेस पर कहीं नजर नहीं आता। आखिर क्या कारण हो सकता है इसका। इसकी कोई खास वजह तो नहीं लेकिन हां यदि आपकेा प्रोडक्टस की सही जानकारी नहीं  होने से आपके मेकअप पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही आप मौसम के अकोर्डिंग मेकअप करेंगी तो भी अच्छा लुक देगा।

मेकअप लाए ग्लो
मेकअप करने का मेन मकसद आपके चेहरे पर ग्लो लाना होता है। त्वचा पर चमक लाने के लिए आजकल बहुत से ब्युटी प्रोडक्टस का इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल यह कमाल है अंडर मेकअप का। इसे मेकअप बेस लगाने से पहले चेहरे पर लगाते है। इसके दो फायदे है एक तो इसे लगाने के बाद बेस को ब्लेंड करना आसान होता है। दूसरे इसे लगाने से चेहरा जबर्दस्त ग्लो करता है। यह ज्यादातर सिलिकाॅन बेस्ड होते है। यह एक प्रकार के इंस्टेट फेस बूस्टर होता है। इसे लगाने से चेहरे के दोष भी आसानी से छिप जाते है और चमक के कारण चेहरा साफ सुथरा नजर आता है।

फ्रेश लुक के लिए
स्किन इलुमिनेटर्स जैसे प्रेाडक्टस त्वचा पर चमक लाने के लिए इस्तेमाल किए जाते है यह पर्लराइज्ड शिमर क्रीम होती है,जो रोशनी को चेहरे पर रिफलेक्ट करती है जिससे चेहरा चमकदार और आकर्षक नजर आता है। इसके अलावा यदि आप मेकअप करते समय पहले प्राइमर का इस्तेमाल करे उसके बाद लोशन मे थोड़ा सा पर्ल एसेंस मिलाकर ब्लेंड करे या फिर उसमें फाउंडेशन मिलाकर चेहरे पर ब्लेंड करेंगी तो इससे आपका चेहरा काफी फ्रेश लुक देगा।

लिप्स को बनाए अट्ैक्टिव
लिप्स यदि आपके अट्ैक्टिव नहीं होगे तो भूल जाइए कि आपका मेकअप मे कुछ बात आ पाएगी। आपने जूसी लिप लुक का नाम तो सुना होगा। ये क्या यह आप नही जानती होगी। यानी होंठो का ऐसा मेकअप जो एकदम ताजे फल जैसा एहसास दे जो कुदरती चमक के साथ रसीला भी होता है। होंठो पर चूकंदर का रस लगाकर सुखा लें। फिर ग्लिसरीन लगाएं। यह होठों को कुदरती लाल बना देगा। अगर आप लिपस्टिक का प्रयोग करती है तो उसके उपर लिप कोग लगाने से होठो पर चमक आ जाएगी। होंठो को वेट लुक देने के लिए,ताकि वे अधिक चमकदार नजर आएं,आप एस्टी लाॅडर प्योर कलर क्रिस्टल ग्लाॅस लगा सकती है।

इन बातो पर ध्यान दें
-रात में जब आप पार्टी में जा रही होती है तो आप मेकअप मे डार्क आई शैडो का इस्तेमाल करे ये सेक्सी लुक देगा।
-गर्मी मे पसीना अधिक आता है इसके लिए आप वाटरप्रूफ प्रोडक्टस का इस्तेमाल करेगी तो अच्छा रहेगा।
-मेकअप करने से पहने मुल्तानी मिटटी मेे टमाटर का जूस मिलाकर लगाने से पसीना कम आता है।
-अगर आंखों के आसपास,गाल या ठोढ़ी की सूजन से तत्काल छुटकारा पाना चाहती है तो एक छोटे चम्मच बर्फ के पानी मे कुछ देर डालकर प्रभावित हिस्से पर रखकर हल्का दबाएं। थोड़ी देर मे धीरे धीरे सूजन कम हो जाएगी।
-अंडर आई कवरेज के लिए ब्लयू बेस्ड कंसीलर चुनें। जो लाइट को रिफलेक्ट करेगा और आंखे चमकदार नजर आएगी। आंखों के नीचे अधिक गहरे काले घेरे हो तो येलो या ओरेंज बेस्ड कंसीलर लगाएं।
-चेहरे पर सन क्रिस्ड ग्लो लाने के लिए पिंकी ब्राउन पाउर्ड फेस ब्रान्जर का प्रयोग करें। ओरंेज टोन वाला बं्रान्जर न चुनें।
-मस्कारा और आईशैडो भी वाटरप्रूफ ही लगाए।

वाॅस से घर को सजाएं




घर का इंटीरियर हमेषा कुछ खास होना चाहिए ।कुछ ऐसी चीजे घर में षामिल करे जो घर को एक अट्ैक्टिव लुक देने के साथ उसे जीवंत बना दे। यहां हम घर में सजाने वाले वाॅस की बात कर रहे है जो घर में टेबल,सोफे के साइडस में या फिर घर के कोनों के खालीपन को दूर करने में सहायक होते है। आज मार्केट में वाॅस की बहुत सी वैरायिटी,डिजाइनस और कलर्स आपको मिल जाएंगे इन्हे आप खाली रखें या इनमे फूल पौधे लगाए ये काफी डिफरेंट लगते है।

मटिरियल

स्टेनलेस स्टील वाॅस
ये वाॅस देखने में सोबर और एलीगेंट नजर आते है। इनके डिजाइन सिंपल होते हुए भी काफी यूनीक लुक देते है। साथ ही यदि आपके घर मे बच्चे है तो आपको इनके टूटने का डर भी नहीं रहता। ये काफी साइज और डिजाइन मे ंहोने से आप अपने घर में किसी भी जगह लगा सकती है। ज्यादातर ये सेंटर टेबल,डाइनिंग टेबल या बैड पर लगे अट्ैक्टिव लगते है।
प््रााइज-600 से षुरू

मुरेनो ग्लास वाॅस
घर को जीवंत बनाने के लिए मुरेनो वाॅस काफी सहायक होते है। ये ब्राइट और कलरफुल होते है। इनमे ओरेंज,रेड,ब्लू ब्राइट कलर्स और काफी डिफरेंट षेपस मे ंये आपको मार्केट में मिल जाएंगे। इन्हे घर में लगाने से घर बहुत ही सुंदर लग उठता है। ये वजन में काफी हैवी होते है लेकिन इनमे आपको काफी साइज मिल जाएंगे। यदि घर का कोई कोना सूना सा लग रहा है तो मुरेनो वाॅस का बड़ा साइज खरीदकर वहां लगा सकती है।
प््रााइज-400 से षुरू 1500 तक

पाॅटरी वाॅस
ये वाॅस बेहद ही सुंदर होते है। इन पर पेंटिंग की जाती है जिनमेे फिगर प्रिंट,सीनरी,जानवरों और पक्षियों के डिजाइन बनाए जाते है जो बहुत ही खुबसूरत नजर आते है। साथ ही रंगों का काॅम्बिनेषन इस तरह किया जाता है जिससे वाॅस काफी अट्ैक्टिव नजर आते है। ज्यादातर इनमें बड़े वाॅस अच्छे लगते है।
प््रााइज-700 से 2000 तक

बैम्बू वाॅस
बैग्बू वाॅस ज्यादातर सिंपल और सिलेंडर षेप में होते है। इनमें बैम्बू प्लांट जो इंडोर प्लांट होते है इनमे लगाए जाए तो ये स्टाइलिष लुक देते है। इनमें साइज छोटे और बड़े दोनो ही आपको मार्केट में आसानी से मिल जाएंगे। बड़े साइज के बैम्बू वाॅस आपको डार्क कलर्स में मार्केट मेे ंमिल जाएंगे। इनमे आप बैम्बू प्लांट लगाए या नही ंतब भी ये बेहद एलीगेंट नजर आते है।
प्राइज-400 से 1000 तक

वुडन वाॅस
अगर बात वुडन वाॅस की जाए तो आज मार्केट में वुडन वाॅस की ढेरो वैरायिटी आपको मिल जाएगी। इन पर बने लकड़ी के डिजाइन,मिनाकरी और कलर्स सभी आप जैसा चाहते है वैसे मिल जाएंगे। इनका चलन सालों से चला आ रहा है। षेपस हो या साइज सभी में आपको ये मार्केट मे मिल जाएंगे। वुड पर मेटलिक पेंट किये वास भी बायर्स की चाहत बने हुए हैं। 
प्राइज-300 से षुरू

इन पर ध्यान दें-
षेपस
शेप के हिसाब से बल्बाकार, फ्लैट एवं कैरिनेट भी तरह से बाजार में ऑन लाइन व ऑफ लाइन उपलब्ध हैं। जब आप खरीदने की सोचें तो सबसे पहले बड शेप, स्कवेयर या सर्कुलर शेप में हीं खरीदें। यदि आपको फूल रखने हैं तो फूल की ब्रांच अथवा बुके के अनुपात में ही वास अच्छे रहते हैं। ।

जगह
हल्के भार वाले डेकोरेटिव वास कोने में ही रखें ताकि  बच्चों की उछल-कूद से सुरक्षित रहें। खास जगह व अवसर के मुताबिक ही पर्चेज करें मसलन डाइनिंग टेबल पर ग्लाॅस वास ठीक रहेंगे। आजकल फेंग शुई के हिसाब से भी लोग फ्लावर वास रखते हैं।

कलर्स
वैसे आप किसी भी कलर में वाॅस खरीदेंगी तो वो अच्छा लुक ही देंगे। लेकिन यदि आप अपने रूम के अकोर्डिंग खरीदें तो और भी बेहतर रहेगा। वैसे वाॅस में ब्राइट कलर्स अच्छा लुक देते है। लेकिन कुछ जगह पर सोबरनेस भी जरूरी होती है। जैसे स्टडी टेबल पर लगा एक सिंपल सा वाॅस ही सही रहेगा।


यदि आपको कुछ खास ओकेजन पर घर को फूलदानो के जरिए सजाना है तो -

1.फूल- यदि कोई ओकजन है तो वाॅस को आप लाल गुलाब के फूलो से सजाए। और इनको ताजा दर्शाने के लिए इन पर पानी की कुछ बूंदे छिडक दें। आप चाहें तो पीले या सफेद रंग के कुछ फूल को इसमें शामिल कर सकते हैं जिससे इसमें थोडा कांट्रास्ट लुक आ जाए। सुंदर से लगे वाॅस में लगे ये फूल घर केा और ब्यूटीफूल बना देगे।

2.रिबन- सजावट के लिए आप रिबन को लगाए आप इसे एक बो तैयार करें और इसको गोंद की मदद से वास पर लगा दें। ऐसा भी कर सकते हैं कि गुलाब के फूलों को लाल रंग के रिबन से बांध दिया जाए।

3.ग्लिटर- फूल के वास के चारों तरफ चमकीली ग्लिटर फैला दें। चाहें तो उससे एक दिल बनाएं और उसी पर वास को रख दें। यही नहीं गुलाब के फूलों की पंखुडियों पर भी ग्लिटर डाल सकते हैं।

 4.स्टोन- रंग बिरंगे पत्थर सजावट में चार चांद लगा सकते हैं। सबसे पहले वाॅस में थोडे से पत्थर डालें और ऊपर से फूलों को सजा दें। लीजिए सज गया आपका फूलदान।

Wednesday, October 11, 2017

दिवाली पर रिश्तेदारों को दें ये गिफट हैम्पर


Piious Organix कंपनी के गिफट हैम्पर 












आर्गेनिक चीजों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें


दिल्ली यूनिवर्सिटी के वुमन एसोसिएशन क्ल्ब में लगी  एग्जीबिशन में आर्गेनिक चीजों की बहार


यदि आप भी नेचुरल या आर्गेनिक चीजों के शौकीन   है तो यहां  हम आपको नहाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों के बारे में बता रहे है जो आपकी स्कीन को बिना किसी कैमिकल के स्वस्थ रखने के काम आएगी।
 शिल्पा गोयल जो Piious Organix कम्पनी को चलाती है के अनुसार नहाने की चीजे जैसे षैम्पू,जैल,साबुन आदि चीजों को आप अपनी दिनचर्या में  शामिल करते ही है लेकिन जरूरी है कि वे आर्गेनिक हो। साथ ही  दिवाली पर गिफट हैम्पर के तौर पर अपने दोस्तों  और रिश्तेदारों को इन्हे देकर उनकी दिवाली आर्गेनिक बना सकते है।

मोजे पहनते समय ध्यान दें




प्रोफेशनल लाइफ में मोजे पहनना हमारी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन मोजे पहनते वक्त इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ये आपके पैरों में अधिक तंग हों। अगर आप रोजाना तंग मोजे पहनते हैं, तो आपको हो सकते हैं यह 5 नुकसान -
-अधिक तंग मोजे पहनने पर आपको पैरों में सूजन सकती है साथ ही रक्तसंचार तीव्र होने से बेचैनी और शरीर में अचानक अत्यधिक गर्मी लगने जैसी समस्याएं हो सकती है।
 -अगर आप लंबे समय तक तंग मोजे पहन कर रखते हैं, तो पैरों में अकड़न हो सकती है और एड़ी पंजे वाला हिस्सा सुन्न पड़ सकता है।
 -पैरों में पसीना निकलने के साथ ही नमी पैदा होने से फंगल इंफेक्शन की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे पैरों की त्वचा खराब हो सकती है।
 -तंग मोजे पहनने की आदत आपको वेरिकोज वेन्स की समस्या का शिकार बना सकती है। इतना ही नहीं, अगर आपको यह समस्या पहले से है, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
 -इसके अलावा तंग मोजे पहनने का एक आम लेकिन परेशानी भरा नुकसान है इससे पैरों पर निशान बन जाने से खुजली और जलन होना।

जूते पहनते समय मोजे क्यों है जरूरी


मोजे के बिना जूते पहनना शायद आजकल के लोगों को बहुत अच्छा लगता है क्योंकि यह इन दिनों का नया फैशन समझा जाता है, लेकिन ऐसा करने वाले लोग शायद नहीं जानते कि इस तरह पैरों में फंफूद के संक्रमण को न्योता दे रहे हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि फैशन के चक्कर में सेहत को नजरअंदाज करने के नतीजे बुरे हो सकते हैं। उन्होंने अगाह किया हैकि मोजे के बिना जूते पहनने से पैरों में दुर्गध और एथलीट फुट या पैरों की दाद जैसी बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। हाल के आंकड़ों से पता चला हे कि इन समस्याओं से निपटने वाली दवाओं की बिक्री में दस फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोजे के बगैर सिर्फ जूता पहनने से पैरों से निकलने वाला पसीना जूते के चमड़े में पहुंचता है। इससे चमड़े में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इस स्थिति में यदि उच् नमी भी मिल जाए तो पैरों में सिर्फ दुर्गध पैदा होती है, बल्कि फफूंद का संक्रमण भी हो जाता है। इस संक्रमण से पैरों में खुजली और बिवाई फटने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


बच्चों में इन 10 तरीकों से डालें काम की आदतें: Good Habits

  POST पेरेंटिंग लाइफस्टाइल good habbits by   Nidhi Goel April 1 Click to share on Twitter (Opens in new window) Click to share on Facebook ...

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